आंवला चूर्ण के फायदे

आंवला चूर्ण के फायदे-आयुर्वेद में आंवला Indian gooseberry अमृत के समान है इसलिए इसे अमृत फल भी कहा जाता है।इसे रसायन ओषधि MEDICINE  कहा जाता है।जो आयु AGE और जवानी को बरकरार रखने के लिए इसका सेवन आयुर्वेद [AYURVEDA  MEDICAL OFFICER ]के विशेषज्ञ इसके सेवन की सलाह देते है।

आंवला Indian gooseberry

आयु AGE बढ़ाने वाला तथा बुढ़ापे को दूर रखने वाला रसायन

लैटिन नाम-Emblica officinalis

English- Indian gooseberry

संस्कृत – आमलकी, धात्री, शिवा

बंगला:- आमलकी, आमरो

मराठी:- आंमलकाँठी, आवली

गुजराती:- आंवला, आमली

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आंवले के औषधीय गुण

आंवले का प्रयोग त्रिफला में मुख्य रूप से किया जाता है।

त्रिफला हरड़ बहेड़ा और आंवला के मिश्रण बनता है।आंवले का प्रयोग चवनप्राश में किया जाता है जो कि चवनप्राश का एक मुख्य घटक द्रव्य है।

आंवला चूर्ण के फायदे विभिन्न रोगों में

आंखों के लिए आंवले का उपयोग-

आंवला जूस यानी कि आंवले के फल का रस आंखों की ज्योति को बढ़ाता है इसके लिए आपको सुबह शाम एक एक चम्मच यानी कि 2 से 3 ग्राम आंवला पाउडर नियमित रूप से लेने पर नेत्र ज्योति में वृद्धि होती है।आंखों की रोशनी को बढ़ाने के लिए आम लीची जूस का सेवन भी कर सकते हैं।रोजाना 20 से 30 मिलीलीटर आंवले का जूस लेने से नेत्र ज्योति  बढ़ती है। तथा आंखों EYES  से संबंधित होने वाले सभी रोगों में आराम होता है ।

मिट्टी के बर्तन में रात को आंवले का पाउडर ANWALA POWDER 10 से 20 ग्राम की मात्रा  WATERV में भीगा कर रखें सुबह प्रातः काल ऊपर के पानी को निठार कर साफ कपड़े से छान कर आंखें धोने  EYES WASH से आंखों के सभी रोगों में फायदा होता है।आयुर्वेद चिकित्सक AYURVED MEDICAL OFFICER  तथा आयुर्वेद के आचार्य आंखों की रोशनी बढ़ाने तथा नेत्र रोगों EYE DISEASE के लिए

आंवले का पाउडर

गिलोय

सत्वसप्तामृत लौह

उपरोक्त औषधियों का प्रयोग एक निश्चित मात्रा में करते हैं जिससे रोगियों को नेत्र रोगों में अत्यधिक लाभ होता है।

नोट किसी भी आयुर्वेदिक औषधि का प्रयोग करने से पूर्व आयुर्वेद चिकित्सा विशेषज्ञों की सलाह जरूर लें।

HAIR DISEASE बालों के लिए आमला  का प्रयोग

आंवला ,शिकाकाई, रीठा और भृंगराज के पाउडर को मिक्स करके लोहे IRONPOT की कढ़ाई में पता कर इसका लेप बालों तथा बालों की जड़ में लगाने से बालों  HAIRS में मजबूती चमकदार SHINE होते हैं।इन सभी औषधियों  MEDICINE को समान मात्रा में मिलाकर सप्ताह WEEK में दो या तीन बार लेप कर सकते हैं।आंवले की गुठली  SEED को पीसकर उससे निकलने वाले रस या तेल OIL का उपयोग बालों की जड़ों में करने से बालों की जड़े मजबूत  STRONGNESS होती है।

नकसीर यानी कि नाक से आने वाला खून  NOSE BLEED में आंवले का प्रयोग

जिन लोगों को नकसीर NOSE BLEED की समस्या है वे सुबह शाम आंवला का पाउडर 2 से 3 ग्राम का सेवन  USE कर सकते हैं।तथा रात को 5 ग्राम से 10 ग्राम पाउडर को पानी  WATER में भिगोकर रखें और सुबह उस पाउडर  को मसल कर इसका सेवन भी कर सकते हैं।

हिक्का यानी की हिचकी रोग में आंवले का प्रयोग

जिन लोगों को हिचकी की बीमारी होती है वह लोग बहुत ही ज्यादा परेशान होते हैं उन लोगों के लिए

पीपली

आंवला और

सोंठ को एक 1 ग्राम की मात्रा  में मिलाकर दिन में दो बार सुबह शाम भूखे पेट सेवन करने से हिचकी रोग में अत्यधिक आराम होता है।

अम्ल पित्त यानी कि एसिडिटी ACIDITY  में आंवले का प्रयोग

जिन व्यक्तियों को अम्ल पित्त ACIDITY की शिकायत है जाने की खट्टी डकार पेट में जलन जैसी शिकायत रहती है।

उन लोगों को 5 ग्राम की मात्रा में आंवला पाउडर को भी जाकर रात को रख दें। सुबह मिश्री मिलाकर पिए।आंवले के पाउडर का प्रयोग 1-1 चम्मच सुबह शाम रेप करने से भी अम्ल पित्त की शिकायत खत्म हो जाती है।

आमाशय के अल्सर ULCER  में आंवले का प्रयोग-

आंवले का रस या आंवले के पाउडर का प्रयोग दिन में दो बार सुबह शाम करने से आमाशय में होने वाले अल्सर ULCER । यानी कि छाले धीरे-धीरे खत्म हो जाते हैं।

बार-बार रुक रुक कर आने वाला मूत्र रोग में आंवले का प्रयोग

आंवले के पेड़ की छाल तथा आंवले की पत्तियों LEAFS को आधा लीटर पानी में उबालकर सुबह शाम इसका काढ़ा  BOILED MEDICINE बनाकर पीने से धीरे धीरे यह समस्या खत्म हो जाएगी।

पसीने की बदबू BODYSMELL की शिकायत में आंवले का प्रयोग

शरीर की दुर्गंध BODY SMELL को खत्म करने के लिए

आंवले का पाउडर दिन में दो बार 3 से 4 ग्राम की मात्रा में लेने से धीरे-धीरे शरीर से आने वाली दुर्गंध BODY SMELL खत्म हो जाती है।

प्रमेह रोग में आंवले का प्रयोग

शुक्र प्रमेह हो या मधुमेह  DIBETEISE दोनों में ही आंवले का प्रयोग अत्यंत ही लाभकारी है आंवले का प्रयोग सुबह शाम 2 से 3 ग्राम की मात्रा में दो बार सामान्य जल से लेने पर धीरे-धीरे शारीरिक कमजोरी तथा मधुमेह रोग DIBETEISE में लाभ होता है।

प्रवाहिका यानी डिसेंट्री रोग में आंवले का प्रयोग

2 से 3 ग्राम की मात्रा पानी के साथ में देने से अथवा आंवले BOILED WATER  बना कर पिलाने से प्रवाहिका (DYSENTERY )रोग में लाभ होता है।

आंवले का प्रयोग लगातार 40 दिन तक करने से त्वचा के रंग में फर्क आने लगता है तथा नेत्र ज्योति बढ़ने लगती है।

अनुभूत प्रयोग:-आंवले के पाउडर  POWDER को 21 बार आंवले के रस में गोट  कर तैयार किया हुआ आंवला पाउडर आमलकी रसायन AMALKI RASAYAN बन जाता है और यह एक 1 ग्राम की मात्रा सुबह-शाम लेने से व्यक्ति में शारीरिक कमजोरी BODY WEAKNESS  खत्म हो जाती है तथा एक रसायन के रूप में शरीर को बलवान  BOOST IMMUNITY AND STAMINA बनाती है।

 

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